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Wednesday, December 17, 2025

Arang Chhattisgarh: 107 शिवलिंग, नगर देवी जैन मंदिर और धरती के नीचे दबा 1700 साल‌ पुरानी इतिहास Complete Travel Guide ।

Arang Chhattisgarh: 107 शिवलिंग, नगर देवी जैन मंदिर और धरती के नीचे दबा 1700 साल‌ पुरानी इतिहास Complete Travel Guide ।



छत्तीसगढ़ के हृदय में बसा आरंग केवल एक नगर नहीं, बल्कि आस्था, पुरातत्व और जीवित इतिहास का संगम है। इसे यूँ ही “मंदिरों की नगरी” नहीं कहा जाता। यहाँ की मिट्टी, तालाब, जंगल और गलियाँ आज भी उन सभ्यताओं की गवाही देती हैं, जो सदियों पहले यहाँ फली-फूलीं।

राजा मोरध्वज और आरंग का नामकरण

पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत का युद्ध खत्म होने के बाद कृष्ण अपने भक्त मोरध्वज की परीक्षा लेना चाहते थे। उन्होंने अर्जुन से शर्त लगाई थी कि उनका उससे भी बड़ा कोई भक्त है। कृष्ण ऋषि का वेश बना अर्जुन को साथ लेकर मोरध्वज के पास पहुंचे और कहा, ‘मेरा शेर भूखा है और वह मनुष्य का ही मांस खाता है।’ राजा अपना मांस देने को तैयार हो गए तो कृष्ण ने दूसरी शर्त रखी कि किसी बच्चे का मांस चाहिए। राजा ने तुरंत अपने बेटे का मांस देने की पेशकश की। कृष्ण ने कहा, ‘आप दोनों पति-पत्नी अपने पुत्र का सिर काटकर मांस खिलाओ, मगर इस बीच आपकी आंखों में आंसू नहीं दिखना चाहिए।’ राजा और रानी ने अपने बेटे का सिर काटकर शेर के आगे डाल दिया। तब कृष्ण ने राजा मोरध्वज को आशीर्वाद दिया जिससे उसका बेटा फिर से जिंदा हो गया।  इसी के आधार पर इसका नामकरण आरा+अंग = आरंग  नाम पड़ा।



107 शिवलिंगों की नगरी – आरंग

मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, प्राचीन काल में आरंग में 107 शिवलिंग विद्यमान थे। आज भी नगर की चारों दिशाओं में अनेक स्वयंभू शिवलिंग विराजमान हैं।

विशेष रूप से पंचमुखी महादेव (पीपलेश्वर महादेव) जन-आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। कहा जाता है कि यहाँ पहले पाँच शिवलिंग स्थापित थे, इसी कारण यह स्थान पंचमुखी कहलाया।
लोककथा के अनुसार, भगवान शिव ने अपने भक्त फिरता लोधी को स्वप्न देकर इस स्थल का रहस्य बताया, जिसके बाद पीपल वृक्ष के नीचे से स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ।
11वीं सदी में राजा मोरध्वज द्वारा निर्मित यह शिव मंदिर नागर शैली की वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मंदिर के परिसर में कुल 108 खंभे हैं, जिनमें 24 खंभे मंदिर मंडप के अंदर हैं, जो 24 घंटे के समय चक्र का प्रतीक माने जाते हैं, और 84 खंभे बाहरी दीवारों में हैं, जो 84 लाख योनियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह स्थापत्य डिज़ाइन मंदिर की ज्योतिषीय और दार्शनिक महत्ता को दर्शाता है।

सूर्य की पहली किरण करती है शिवलिंग का अभिषेक इस मंदिर की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि प्रत्येक दिन सूर्योदय की पहली किरण सीधे शिवलिंग पर पड़ती है। यह ज्योतिषीय गणना और स्थापत्य कौशल का अद्भुत प्रमाण है।

➡️ आज भी यहाँ जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और सावन अनुष्ठान पूरे विधि-विधान से होते हैं।



जल में डूबा शिवलिंग – अद्भुत आस्था

आरंग का नकट्टी तालाब एक अनोखे रहस्य को समेटे है। इस तालाब के भीतर स्थित एक प्राचीन शिवलिंग वर्ष भर जल में डूबा रहता है।
केवल गर्मी के कुछ महीनों में इसके दर्शन संभव हो पाते हैं।

यह शिवलिंग प्राचीन शैव स्थापत्य परंपरा का उदाहरण है, जिसमें शिव के तीन स्वरूप ब्रह्मा, विष्णु और महेश एक ही लिंग में दर्शाए गए माने जाते हैं।



नगर देवी माता खल्लारी

आरंग की नगर देवी माता खल्लारी पश्चिममुखी स्वरूप में विराजमान हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग 53 के समीप स्थित यह मंदिर वर्ष भर श्रद्धालुओं से भरा रहता है। माता की प्रतिमा तीन पत्थरों से निर्मित मानी जाती है। पहले यह स्थान घने जंगलों से घिरा था। समीप प्राचीन तालाब (झिलमिली तालाब) स्थित है
स्थानीय मान्यता है कि माता खल्लारी नगर की रक्षक देवी हैं और महामारी, विपत्ति व संकट से नगर की रक्षा करती हैं।



स्वयंभू शक्तिपीठ – समिया माता

माता समिया को आरंग का स्वयंभू शक्तिपीठ माना जाता है। यह मंदिर ऊँचे टीले पर स्थित है और अत्यंत प्राचीन है।
यहाँ विवाह में विलंब, संतान प्राप्ति और गृहस्थ सुख के लिए विशेष पूजा होती है। मंदिर परिसर में पीपल व बरगद के प्राचीन वृक्ष हैं। सुरंग और गुफाओं से जुड़ी कई किंवदंतियाँ प्रचलित हैं। माता के साथ समलेश्वरी और बूढ़ी माई की उपस्थिति भी लोकमानस में गहराई से जुड़ी है।



जैन धर्म का प्राचीन केंद्र

आरंग प्राचीन काल में जैन धर्म का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। भांडदेवल जैन मंदिर इसका सशक्त प्रमाण है।
यह मंदिर पंचरथ शैली में निर्मित अष्टकोणीय मंडप और सुंदर मूर्तिकला से सुसज्जित अजीतनाथ, नेमिनाथ और शांतिनाथ की प्रतिमाओं से अलंकृत आज भी नगर में जगह-जगह जैन प्रतिमाएँ देखी जा सकती हैं।


1700 वर्ष पुरानी नरसिंह प्रतिमा

तालाब खुदाई के दौरान आरंग के ग्राम क्षेत्रों में भगवान नरसिंह की योगमुद्रा में बैठी प्रतिमा प्राप्त हुई, जिसकी आयु लगभग 1700 वर्ष आँकी गई है। यह प्रतिमा लाल बलुआ पत्थर से निर्मित गुप्तकालीन कला शैली से मेल खाती वर्तमान में महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर में संरक्षित है साथ ही प्राचीन मृद्भांड, पात्र और खंडित मूर्तियाँ भी मिली हैं।



तालाबों से उभरता इतिहास

अंधियार खोप तालाब, झालमला तालाब और अन्य जलाशयों की सफाई व खुदाई में देवी-देवताओं की मूर्तियाँ पाषाण स्तंभ प्राचीन ईंटें और पात्र लगातार मिलते रहे हैं, जो यह सिद्ध करते हैं कि आरंग की भूमि के नीचे अभी भी विशाल पुरातात्विक धरोहर दबी हुई है।


🗓️ Best Time to Visit Arang

आरंग वर्ष भर भ्रमण योग्य है, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव के लिए कुछ विशेष समय सर्वोत्तम माने जाते हैं:

✅ अक्टूबर – मार्च (Best Season)

मौसम सुहावना
मंदिर दर्शन व पुरातात्विक भ्रमण के लिए आदर्श


🔱 सावन मास (जुलाई–अगस्त)

पंचमुखी महादेव में विशेष अनुष्ठान
शिवभक्तों के लिए सर्वोत्तम समय


🌕 नवरात्रि व महाशिवरात्रि

माता खल्लारी और समिया माता मंदिर में विशेष पूजा
नगर में धार्मिक उत्सवों का वातावरण




🧭 Things To Do in Arang (क्या करें आरंग में)

1. पंचमुखी महादेव दर्शन एवं रुद्राभिषेक
2. नकट्टी तालाब के जलमग्न शिवलिंग का अवलोकन
3. समिया माता शक्तिपीठ में विशेष पूजा-अर्चना
4. भांडदेवल जैन मंदिर में मूर्तिकला अध्ययन
5. तालाबों और पुरातात्विक स्थलों की पैदल यात्रा (Heritage Walk)
6. स्थानीय लोककथाओं और किंवदंतियों को जानना
7. फोटोग्राफी – मंदिर, तालाब, मूर्तियाँ और प्राचीन गलियाँ




🗺️ Nearby Attractions (आरंग के आसपास घूमने योग्य स्थान)

🛕 महामाया मंदिर, रायपुर – 22 किमी
🏛️ पुरखौती मुक्तांगन – 25 किमी
🌊 खारून नदी घाट – 15 किमी
🏺 महंत घासीदास संग्रहालय, रायपुर – 24 किमी
🛕 राजीव लोचन मंदिर, राजिम – 45 किमी
🌿 सिरपुर (बौद्ध–शैव धरोहर स्थल) – 75 किमी




आरंग कैसे पहुँचें? (How to Reach) Best Route 

छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी आरंग, राज्य की राजधानी रायपुर से बहुत नज़दीक स्थित है। सड़क, रेल और हवाई तीनों माध्यमों से यहाँ पहुँचना आसान और सुविधाजनक है।


🛣️ सड़क मार्ग से आरंग कैसे पहुँचें (Best Route)

✅ रायपुर → आरंग (सबसे आसान और लोकप्रिय मार्ग)

दूरी: लगभग 22–25 किमी

समय: 40–50 मिनट

मार्ग:
Raipur → Mana → NH-53 → Arang


यह मार्ग पूरी तरह पक्की सड़क, कम ट्रैफिक और साल भर उपयोग योग्य है।
🚗 निजी कार, टैक्सी और बस तीनों के लिए यह Best Route माना जाता है।

🚌 बस सुविधा

रायपुर पंडरी बस स्टैंड से आरंग के लिए नियमित बसें

अंतराल: हर 15–30 मिनट

किराया: ₹30–₹60


🚆 रेल मार्ग 

🚉 निकटतम रेलवे स्टेशन: आरंग महाविद्यालय / आरंग रेलवे स्टेशन

रायपुर–विशाखापत्तनम रेललाइन पर स्थित

रायपुर से लोकल पैसेंजर व मेमू ट्रेनें उपलब्ध


👉 यदि लंबी दूरी से आ रहे हों, तो पहले रायपुर जंक्शन उतरना सबसे सुविधाजनक है।

प्रमुख रेलवे स्टेशन दूरी

रायपुर जंक्शन → आरंग: ~25 किमी

स्टेशन से टैक्सी/ऑटो उपलब्ध


✈️ हवाई मार्ग 

🛫 निकटतम एयरपोर्ट: स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट, रायपुर

दूरी: लगभग 30 किमी
देश के प्रमुख शहरों से सीधी उड़ानें उपलब्ध है।

✈️ एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा 45–60 मिनट में आरंग पहुँचा जा सकता है।





🗓️ 1-Day Itinerary travel plan

🟢 One Day Spiritual Heritage Tour

सुबह

पंचमुखी महादेव दर्शन
नकट्टी तालाब शिवलिंग अवलोकन
तालाब खुदाई क्षेत्र


दोपहर

समिया माता शक्तिपीठ
स्थानीय भोजन


शाम

माता खल्लारी मंदिर
भांडदेवल जैन मंदिर
आसपास के ग्राम क्षेत्र
मोरध्वज की स्थानीय लोककथाएँ




💰 Budget Estimate (प्रति व्यक्ति)
👉 कुल बजट: ₹500 – ₹1,000


यात्रा टिप्स (Travel Tips)

सुबह या शाम का समय यात्रा के लिए बेहतर
सावन और नवरात्रि में भीड़ अधिक रहती है
धार्मिक स्थलों पर सादे कपड़े पहनें
गर्मियों में पानी साथ रखें


जीवित विरासत का नगर है आरंग

आरंग केवल अतीत की कहानी नहीं है। यह आस्था की जीवित परंपरा, इतिहास की साँस लेती भूमि और भविष्य के शोध की अनंत संभावनाएँ है।
यदि इसे संरक्षित, शोधित और सम्मानित किया जाए, तो आरंग न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि समूचे भारत के सांस्कृतिक मानचित्र पर एक उज्ज्वल केंद्र बन सकता है।
आरंग जहाँ पत्थर भी कथा कहते हैं, और आस्था इतिहास बन जाती है।




> ✨ अगर आप केवल देखने नहीं, बल्कि इतिहास को महसूस करना चाहते हैं। तो आरंग आपकी अगली यात्रा होनी चाहिए।
आज ही आरंग की यात्रा की योजना बनाएँ और छत्तीसगढ़ की जीवित विरासत से जुड़ें।

क्या आपने कभी जलमग्न शिवलिंग के दर्शन किए हैं?
आपको आरंग का कौन-सा पक्ष सबसे अधिक आकर्षित करता है आस्था, इतिहास या रहस्य?

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