फ्लेमिंगो से लेकर सारस तक : भारत की पक्षी विरासत, प्रकृति प्रेमियों और यात्रियों के लिए संपूर्ण गाइड
“पक्षियों की दुनिया - आपकी अगली यात्रा।”
भारत सिर्फ़ पहाड़ों, मंदिरों और ऐतिहासिक किलों का देश नहीं है, यह दुनिया के सबसे समृद्ध पक्षी आवासों में से एक है।
समुद्री लैगून से लेकर शहरी वेटलैंड, पहाड़ी झीलों से लेकर मैंग्रोव के छोटे-छोटे पैच देश भर में ऐसे कई पक्षी अभ्यारण्य हैं जो ख़ासकर सर्दियों में हजारों देशी और प्रवासी पक्षियों से जी उठते हैं।
यहाँ आपके लिए चुनी हुई सूची है भारत के 15 शानदार पक्षी अभ्यारण्यों की
इनकी खासियत, कहाँ हैं, कब जाएँ, कैसे पहुँचे और वहाँ क्या-क्या कर सकते हैं (ख़ासकर अगर आपको बर्डवॉचिंग और फोटोग्राफी का शौक है)।
1. पोरबंदर पक्षी अभ्यारण्य, गुजरात
क्यों खास है
शहर के बीचों-बीच बसने वाला भारत के चुनिंदा छोटे लेकिन महत्वपूर्ण पक्षी अभ्यारण्यों में से एक।
सिर्फ़ 9.33 हेक्टेयर क्षेत्र का यह वेटलैंड, फ्लेमिंगो, पेलिकन, डक, एवोसेट, कूट, कॉर्मोरेंट, बगुले, सारस, टर्न, गल्स और इंडियन रोलर जैसे कई प्रवासी और स्थानीय पक्षियों से भर जाता है।
छोटा होने के कारण इसे पैदल ही आसानी से कवर किया जा सकता है।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
पोरबंदर शहर, गुजरात
शहर के भीतर ही स्थित — आसान पहुँच
कब जाएँ (Best Time)
नवंबर से फरवरी (सर्दियों में प्रवासी पक्षियों की भरमार)
कैसे पहुँचे
रेल: पोरबंदर रेलवे स्टेशन – लगभग 1.1 किमी
एयरपोर्ट: पोरबंदर हवाई अड्डा – थोड़ी ही दूरी पर
लोकल ऑटो/टैक्सी आसानी से उपलब्ध
क्या करें (Best Things to Do)
झील के चारों ओर शांत वॉक
सुबह और शाम बर्डवॉचिंग
साथ में कीर्ति मंदिर, सुदामा मंदिर और बार्डा हिल्स वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी भी देख सकते हैं
फोटोग्राफी टिप
एक जगह 20–30 मिनट शांत बैठकर रहें, पक्षी खुद-ब-खुद पास आने लगते हैं। 200–600mm ज़ूम लेंस यहाँ बहुत काम आता है।
2. जयाकवाड़ी पक्षी अभ्यारण्य, महाराष्ट्र
क्यों खास है
नाथ सागर जलाशय के बैकवॉटर पर फैला हुआ यह लगभग 341 वर्ग किमी क्षेत्र छोटे-छोटे द्वीपों से भरा है, जो पक्षियों के लिए आदर्श घोंसला और विश्राम स्थल बनाते हैं।
यहाँ 300 से ज़्यादा पक्षी प्रजातियाँ मिलती हैं — फ्लेमिंगो, स्पूनबिल, पेंटेड स्टॉर्क, नाइट हेरॉन, नॉर्दर्न शोवलर आदि।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
जयाकवाड़ी गाँव के पास, पैठण तहसील
नज़दीकी मुख्य शहर: औरंगाबाद (महाराष्ट्र)
कब जाएँ
अक्टूबर से फरवरी
कैसे पहुँचे
रोड: औरंगाबाद → पैठण → जयाकवाड़ी
रेल/एयर: औरंगाबाद तक ट्रेन/फ्लाइट, वहाँ से टैक्सी
क्या करें
बैकवॉटर में नाव से पक्षी दर्शन (जहाँ अनुमति हो)
द्वीपों के आसपास बर्डिंग
नज़दीकी संत ज्ञानेश्वर उद्यान और पिकनिक स्पॉट देखना
फोटोग्राफी टिप
सुबह-सुबह हल्का कोहरा और पानी से उठती धुंध के बीच उड़ते पक्षियों की सिल्हूट शॉट्स कमाल बनते हैं। आसमान की ओर हल्का अंडरएक्सपोज करके शूट करें।
3. सूरजपुर पक्षी अभ्यारण्य, उत्तर प्रदेश
क्यों खास है
ग्रेटर नोएडा के पास स्थित यह अर्बन वेटलैंड ये साबित करती है कि शहर और जंगल साथ रह सकते हैं।
लगभग 300 एकड़ में फैले इस क्षेत्र में स्पॉट-बिल्ड डक, लेसर व्हिस्टलिंग डक, कॉटन पिग्मी गूज, कॉम्ब डक जैसी प्रजनन प्रजातियाँ मिलती हैं, और सर्दियों में रेड-क्रेस्टेड पचार्ड, बार-हेडेड गूज, ग्रेलैग गूज, कॉमन टील, नॉर्दर्न शोवलर, गैडवॉल आदि पहुँचते हैं।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
गौतम बुद्ध नगर जिला, उत्तर प्रदेश
नज़दीकी शहर: ग्रेटर नोएडा / दिल्ली NCR
कब जाएँ
नवंबर से मार्च
कैसे पहुँचे
दिल्ली / नोएडा / ग्रेटर नोएडा से सीधे सड़क मार्ग
कार, कैब, बाइक सभी विकल्प संभव
क्या करें
चिन्हित ट्रेल पर वॉक
वॉचटॉवर से पूरे वेटलैंड का नज़ारा
बर्ड हाइड में बैठकर शांत बर्डवॉचिंग
फोटोग्राफी टिप
शहरी वेटलैंड होने की वजह से पक्षी थोड़ा सतर्क रहते हैं। धीरे चलें, हल्के रंग के कपड़े पहनें और हाइड का उपयोग करें, क्लोज़ शॉट्स अच्छे मिलेंगे।
4. समन पक्षी अभ्यारण्य, उत्तर प्रदेश
क्यों खास है
गंगा के पुरानी धारा (oxbow lake) पर बना यह वेटलैंड सर्दियों में 50,000 से अधिक जलपक्षियों का घर बनता है।
इसे ख़ास तौर पर सारस क्रेन की बड़ी आबादी की रक्षा के लिए 1990 में संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया।
यहाँ लगभग 187 पक्षी प्रजातियाँ दर्ज हैं, जिनमें सारस क्रेन और ग्रेटर स्पॉटेड ईगल जैसे संवेदनशील पक्षी भी शामिल हैं।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
मैनपुरी जिला, उत्तर प्रदेश
नज़दीकी टाउन: मैनपुरी / इटावा क्षेत्र
कब जाएँ
नवंबर से फरवरी
कैसे पहुँचे
मैनपुरी से सड़क मार्ग
लोकल टैक्सी/जीप से अंतिम दूरी तय करें
क्या करें
सारस क्रेन को जोड़ों में दलदल में टहलते देखना
नीलगाय, गोह (बंगाल मॉनिटर लिज़र्ड) आदि वन्यजीवों का निरीक्षण
वेटलैंड के किनारे शांत वॉक
फोटोग्राफी टिप
सारस से सम्मानजनक दूरी बनाए रखें; वे संवेदनशील और क्षेत्रीय स्वभाव के होते हैं। लंबे लेंस (400mm+) से दूर से ही शूट करें। साइड लाइट में उनकी गर्दन और लाल सिर बहुत खूबसूरत दिखते हैं।
5. पुलिकट झील पक्षी अभ्यारण्य, आंध्र प्रदेश / तमिलनाडु
क्यों खास है
भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून जो आंध्र और तमिलनाडु दोनों राज्यों में फैली है।
यहाँ 200 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ मिलती हैं और सर्दियों में फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्टॉर्क, बगुले और डक के बड़े झुंड पूरे क्षेत्र को जीवंत बना देते हैं।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
नेल्लोर जिला (आंध्र) + हिस्सा तमिलनाडु में
श्रीहरिकोटा के पास, बंगाल की खाड़ी के किनारे
कब जाएँ
नवंबर से फरवरी
कैसे पहुँचे
चेन्नई या नेल्लोर से सड़क मार्ग
सुलेरपेटा आदि के आसपास कई एंट्री पॉइंट
क्या करें
लैगून किनारे बर्डिंग
श्रीहरिकोटा क्षेत्र (ध्यान रहे – स्पेस सेंटर क्षेत्र में कई प्रतिबंध हैं)
स्थानीय बर्ड फेस्टिवल (यदि उस समय हों)
फोटोग्राफी टिप
यहाँ बहुत बड़े–बड़े फ्लॉक होते हैं, इसलिए बहुत ज़्यादा क्लोज़अप के बजाय वाइड एंगल से आसमान और पानी दोनों में भरे पक्षियों के साथ फ्रेम बनाना शानदार रहता है।
6. डॉ. भीमराव अंबेडकर पक्षी वन्यजीव अभ्यारण्य, उत्तर प्रदेश
क्यों खास है
गंगा नदी के किनारे कुंडा (प्रतापगढ़) के पास स्थित यह 427 हेक्टेयर क्षेत्र कई तालाबों और झीलों (बेती तालाब, पूर्णेमऊ तालाब, बनेमऊ तालाब, शाहपुर तालाब) को शामिल करता है।
सर्दियों में यहाँ यूरोप और साइबेरिया तक से आए प्रवासी पक्षी दिखते हैं।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
कुंडा, प्रतापगढ़ जिला, उत्तर प्रदेश
कब जाएँ
नवंबर से फरवरी
कैसे पहुँचे
प्रतापगढ़ / प्रयागराज (इलाहाबाद) से सड़क मार्ग
लोकल टैक्सी से अलग-अलग तालाबों तक जाना बेहतर
क्या करें
विभिन्न तालाबों के किनारे बर्डिंग
रोसी पेलिकन, ग्रेलैग गूज, पिंटेल, पेंटेड स्टॉर्क आदि देखना
जंगल बिल्ली, लोमड़ी, सियार, नीलगाय जैसे स्तनधारियों का अवलोकन
फोटोग्राफी टिप
हर तालाब का चरित्र अलग होता है कुछ में गहरी पानी वाली डक, कुछ में उथले पानी के वाडर। अलग-अलग तालाब बदलते रहें, तभी ज्यादा विविध फोटो मिलेंगे।
7. सूर सरोवर पक्षी अभ्यारण्य, उत्तर प्रदेश
क्यों खास है
आगरा के पास स्थित यह अभ्यारण्य शांत कीथम झील के चारों ओर फैला है।
ताजमहल देखने के बाद यह एक परफेक्ट शांत–सुस्ताने वाली जगह है, जहाँ पानी, हरियाली और पक्षी तीनों मिलते हैं।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
आगरा के नज़दीक, उत्तर प्रदेश
कब जाएँ
नवंबर से मार्च
कैसे पहुँचे
आगरा शहर से सड़क मार्ग
ऑटो, कैब आसानी से मिल जाती हैं
क्या करें
झील किनारे बर्डवॉचिंग
बोटिंग (जहाँ अनुमति हो)
हेरॉन, एग्रेट, किंगफिशर, कभी-कभी सारस क्रेन देखना
फोटोग्राफी टिप
झील का शांत पानी रिफ्लेक्शन के लिए बढ़िया है। पक्षी के साथ उसकी परछाई को फ्रेम में शामिल करने की कोशिश करें।
8. खिजड़िया पक्षी अभ्यारण्य, गुजरात
क्यों खास है
जामनगर के पास मौजूद यह अभ्यारण्य अनोखा है क्योंकि यहाँ मीठे पानी और खारे पानी दोनों प्रकार के आवास मिलते हैं।
यही कारण है कि यहाँ 220 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ दर्ज हैं फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्पूनबिल, डक, एग्रेट, हेरॉन वगैरह।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
जामनगर के पास, गुजरात
कब जाएँ
नवंबर से फरवरी
कैसे पहुँचे
जामनगर शहर से सड़क मार्ग
जामनगर में रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट दोनों उपलब्ध
क्या करें
नेचर ट्रेल्स पर लंबी वॉक
बंड और वेटलैंड किनारे शांत बैठना
आसपास के दूसरे कोस्टल बर्डिंग स्पॉट के साथ प्लान करना
फोटोग्राफी टिप
यहाँ कीचड़, नमक और हवा के कारण लेंस पर स्प्रे और धूल जल्दी जमती है। लेंस क्लॉथ साथ रखें और बार-बार साफ़ करते रहें।
9. चिन्तामणि कर पक्षी अभ्यारण्य, पश्चिम बंगाल
क्यों खास है
कोलकाता के पास स्थित यह छोटा-सा हराभरा टुकड़ा पहले आम का बगीचा था, जिसे बाद में पक्षी अभ्यारण्य घोषित किया गया।
यहाँ 150 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ दर्ज हैं एशियन कोईल, कॉमन हॉक कुक्कू, किंगफिशर, क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल, टिकेल्स थ्रश, ब्लू-थ्रोटेड फ्लायकैचर जैसे कई रोमांचक पक्षी।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
नरेंद्रपुर, दक्षिण 24 परगना
नज़दीक: कोलकाता
कब जाएँ
सर्दी और बसंत, ख़ासकर सुबह-सुबह
कैसे पहुँचे
कोलकाता से लोकल ट्रेन/मेट्रो + ऑटो
बहुत ही आसान डे ट्रिप
क्या करें
घने पेड़ों के नीचे धीमी वॉक
बर्डवॉचिंग और बटरफ्लाई वॉचिंग
शहर की भीड़ से दूर शांत समय बिताना
फोटोग्राफी टिप
जंगल के भीतर रोशनी कम रहती है, इसलिए फास्ट लेंस (f/2.8–f/4) और हाई ISO की जरूरत पड़ेगी। किसी अच्छे “पेर्च” (टहनी/डाली) पर फोकस करके इंतज़ार करें, पक्षी खुद आएँगे।
10. फुदम पक्षी अभ्यारण्य, दीव
क्यों खास है
दीव द्वीप पर स्थित यह शांत–सा दलदली इलाका फ्लेमिंगो, पेंटेड स्टॉर्क, पैडी फील्ड पिपिट, पर्पल सनबर्ड सहित कई प्रवासी और स्थानीय पक्षियों को आकर्षित करता है।
यहाँ एक ऊँचा वॉच टावर है, जहाँ से पूरा वेटलैंड दिखता है।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
दीव द्वीप, केंद्रशासित प्रदेश
नज़दीक: दीव शहर
कब जाएँ
नवंबर से फरवरी
कैसे पहुँचे
दीव टाउन से सड़क मार्ग
दीव में एयरपोर्ट और गुजरात से रोड कनेक्शन दोनों
क्या करें
टावर से बर्डवॉचिंग
पास के बीच, किला और दीव टाउन घूमना
सुबह या शाम को शांत बर्डिंग
फोटोग्राफी टिप
टावर से ऊपर से शूट करते वक्त पैटर्न पर ध्यान दें पानी में खड़े पक्षियों, चैनल और घास के पैच से अच्छी कम्पोज़िशन बनती है।
11. कोंडाकरला पक्षी अभ्यारण्य, आंध्र प्रदेश
क्यों खास है
कोंडाकरला अवा झील के आसपास बसा यह क्षेत्र, विशाखापट्टनम के पास एक खूबसूरत फ्रेशवॉटर लेक सिस्टम है।
यहाँ ग्रे हेरॉन, फेजेंट-टेल्ड जैकाना, रेड-व्हिस्कर्ड बुलबुल सहित कई पक्षी दिखते हैं।
स्थानीय लोगों द्वारा ताड़ के पेड़ों के लॉग से बनी नावें इस अनुभव को और देहाती व आकर्षक बना देती हैं।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
विशाखापट्टनम के पास, आंध्र प्रदेश
कब जाएँ
नवंबर से फरवरी
कैसे पहुँचे
विशाखापट्टनम से सड़क मार्ग
विशाखापट्टनम में रेल और एयर दोनों सुविधाएँ
क्या करें
पारंपरिक नाव की सैर
झील किनारे बर्डवॉचिंग
शांत वातावरण में नेचर का आनंद
फोटोग्राफी टिप
जहाँ तक हो सके, नाव से लो-एंगल शॉट लें ताकि पानी की लेवल से नज़दीक महसूस हो। इससे पक्षी ज़्यादा नैचुरल और शानदार लगते हैं।
12. नलबन (नलबाना) पक्षी अभ्यारण्य, ओडिशा
क्यों खास है
चिलिका झील के बीच स्थित नलबाना द्वीप, रामसर स्थल का मुख्य हिस्सा है और भारत के सबसे मशहूर विंटरिंग ग्राउंड में से एक है।
यहाँ फ्लेमिंगो, हेरॉन, एग्रेट, स्पूनबिल, पेलिकन, स्टॉर्क, ब्लैक-हेडेड आइबिस और स्पून-बिल्ड सैंडपाइपर जैसे दुर्लभ पक्षी भी देखे जाते हैं।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
चिलिका झील, पुरी / भुवनेश्वर क्षेत्र, ओडिशा
कब जाएँ
दिसंबर से फरवरी
कैसे पहुँचे
पुरी / भुवनेश्वर से सड़क मार्ग द्वारा चिलिका के एंट्री पॉइंट (जैसे सतपाड़ा)
वहाँ से बोट द्वारा नलबना क्षेत्र तक (सिर्फ़ अनुमत मार्गों से)
क्या करें
बोट सफारी
फ्लेमिंगो और दूसरे पक्षियों के बड़े झुंड देखना
चिलिका झील के अन्य हिस्से भी एक्सप्लोर करना
फोटोग्राफी टिप
फ्लेमिंगो जब उड़ान भरते हैं, तब बर्स्ट मोड ऑन रखें। उनके गुलाबी पंख और पानी के छींटें एक साथ बहुत ही ड्रामेटिक फ्रेम बनाते हैं।
13. मयानी पक्षी अभ्यारण्य, महाराष्ट्र
क्यों खास है
सातारा जिले के मयानी गाँव के पास पुराने बांध पर बना यह वेटलैंड लगभग 8.67 वर्ग किमी में फैला है और 400 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ यहाँ दर्ज हैं।
फ्लेमिंगो, ब्राह्मणी डक, पेंटेड स्टॉर्क, कॉमन स्पूनबिल, ब्लैक आइबिस, किंगफिशर आदि यहाँ आम दृश्य हैं।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
मयानी गाँव, सातारा जिला, महाराष्ट्र
नज़दीकी मुख्य शहर: सातारा
कब जाएँ
नवंबर से फरवरी
कैसे पहुँचे
सातारा से सड़क मार्ग द्वारा मयानी
सातारा – पुणे / मुंबई से रेल-रोड कनेक्शन
क्या करें
बांध और वेटलैंड किनारे बर्डवॉचिंग
आसपास का ग्रामीण इलाका देखना
सूर्योदय, सूर्यास्त दोनों समय शांत बैठकर निरीक्षण
फोटोग्राफी टिप
सर्दियों की सॉफ्ट, हल्की धूप का पूरा उपयोग करें कम कॉन्ट्रास्ट, पेस्टल टोन में बहुत खूबसूरत फोटो बनते हैं।
14. मंगलवनम पक्षी अभ्यारण्य, केरल
क्यों खास है
कोच्चि शहर के बीचों-बीच बसा यह छोटा-सा 2.74 हेक्टेयर मैंग्रोव वेटलैंड “ग्रीन लंग ऑफ कोच्चि” कहलाता है।
यहाँ 70 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ, मैंग्रोव, और शैलो वॉटर बॉडीज़ का सुंदर मिश्रण है।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
कोच्चि, केरल सीधे शहर के भीतर
कब जाएँ
नवंबर से मार्च, सुबह और शाम
कैसे पहुँचे
कोच्चि के किसी भी हिस्से से आसानी से बस / ऑटो / कैब द्वारा
क्या करें
ऊँचे वॉकवे और ट्रेल्स पर टहलना
छोटी बगुला, इंडियन पोंड हेरॉन, टील आदि देखना
शहर के बीचों-बीच प्रकृति का छोटा पॉकेट एन्जॉय करना
फोटोग्राफी टिप
कम्पैक्ट गियर बेहतर है हल्का टेलीफोटो और एक फिक्स्ड लेंस। बड़े-बड़े बैग और भारी सिस्टम की ज्यादा जरूरत नहीं।
15. बरेला (बरैला लेक सलीम अली–जुब्बा साहनी) पक्षी अभ्यारण्य, बिहार
क्यों खास है
वैशाली जिले में स्थित यह 1.96 वर्ग किमी अभ्यारण्य, बरैला झील पर केंद्रित है और गंगा के मैदानों के पक्षियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
यहाँ लगभग 106 स्थानीय और 59 प्रवासी पक्षी दर्ज हैं इंडियन शैग, रेड कॉलर्ड डव, एशियन कोईल, ग्रीन बी-ईटर, ब्लैक आइबिस, रुड्डी शेलडक, बार-हेडेड गूज, ओरिएंटल मैगपाई रॉबिन, लेसर व्हिस्टलिंग डक आदि।
लोकेशन व नज़दीकी शहर
वैशाली जिला, बिहार
नज़दीक: हाजीपुर / पटना क्षेत्र
कब जाएँ
नवंबर से फरवरी
कैसे पहुँचे
पटना / हाजीपुर से सड़क मार्ग
लोकल टैक्सी / साझा वाहन से झील तक पहुँच
क्या करें
झील किनारे बर्डवॉचिंग
मछली पकड़ते स्थानीय लोगों और गाँव के जीवन को देखना
सुबह-सुबह या शाम को शांत सैर
फोटोग्राफी टिप
यहाँ प्रकृति और लोक जीवन साथ–साथ चलते हैं। सिर्फ़ पक्षियों के क्लोज़अप ही नहीं, नाव, मछुआरे, गाँव की पृष्ठभूमि के साथ वाइड, स्टोरी–टेलिंग शॉट भी लें।
📷 सभी अभ्यारण्यों के लिए कुछ कॉमन बर्ड फोटोग्राफी टिप्स
सुबह और शाम – यही गोल्डन टाइम है, रोशनी भी अच्छी, पक्षियों की गतिविधि भी।
धीरे चलें, कम बोलें – शोर और तेज़ मूवमेंट से पक्षी उड़ जाते हैं।
साधारण / मिट्टी के रंग के कपड़े पहनें – हरा, भूरा, ग्रे; बहुत चमकीले रंग से परहेज़ करें।
टेलीफोटो लेंस (200mm से ऊपर) अगर संभव हो, तो ज़रूर रखें।
दूरी का सम्मान – सिर्फ़ फोटो के लिए पक्षी को भगाना या परेशान करना ठीक नहीं।
क्लोज़अप + हाबिटैट दोनों शॉट लें – ताकि आपकी फोटो सिर्फ़ “चेहरा” ही नहीं, पूरा माहौल भी दिखाए।
📝 निष्कर्ष
परों वाली दुनिया, हमारे ही आसपास
चाहे पुलिकट और चिलिका (नलबना) जैसी विशाल लैगून हों, या समन, मयानी, जयाकवाड़ी जैसे शांत वेटलैंड, या फिर मंगलवनम और चिन्तामणि कर जैसे छोटे शहरी जंगल
भारत के पक्षी अभ्यारण्य सिर्फ़ बर्डिंग स्पॉट नहीं हैं, ये ज़िंदा क्लासरूम हैं
जहाँ आप प्रवास, मौसम, जल–स्थल पारिस्थितिकी और सह-अस्तित्व की असली कहानी देख सकते हैं।
हर एक अभ्यारण्य की अपनी अलग पहचान है।
कोई बहुत वाइल्ड, कोई छोटा, कोई शहर के बीच, कोई दूरदराज़…
लेकिन सब हमें एक ही बात याद दिलाते हैं:
अगर हम वेटलैंड, जंगल और झीलें बचाते हैं, तो जीवन खुद-ब-खुद लौट आता है।
अगर आपको इन 15 में से
बस एक अभ्यारण्य चुनना पड़े अपनी अगली यात्रा के लिए
👉 आप कौन-सा चुनेंगे, और क्यों?
फ्लेमिंगो से भरा हुआ पुलिकट?
शहर के बीचों-बीच मंगलवनम या सूरजपुर?
या फिर कोई वाइल्ड वेटलैंड जैसे जयाकवाड़ी या नलबना?
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